इटावा के कथावाचक संतराम यादव के अपमान का मामला अब तुल पकड़ता जा रहा है इस पर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है इस पर अब अखिलेश यादव भी कूद चुके हैं अखिलेश यादव ने संतराम यादव और उसके सहयोगी को लखनऊ बुलाकर सम्मानित भी किया अखिलेश यादव ने अपने ट्विटर हैंडल X पर कई फोटो शेयर करते हुए लिखा की आज लखनऊ में ‘इटावा कथावाचन पीडीए अपमान कांड’ के पीड़ितों का सम्मान किया गया और उनकी आर्थिक हानि के लिए सहायता राशि दी गयी व जिस दृष्टिहीन कलाकार की ढोलक छीनी गयी, उसे नई ढोल भी दी गयी।
– भागवत कथा तो सबके लिए है, जब सब सुन सकते हैं तो सब बोल क्यों नहीं सकते?
– भागवत तो भगवान कृष्ण से जुड़ी है, अगर सच्चे कृष्ण भक्तों को ही भागवत कथा कहने से रोका जाएगा तो कोई ये अपमान क्यों सहेगा?
– कुछ लोग कथावाचन में अपना एकाधिकार बनाए रखना चाहते हैं
– कथावाचन को जिन्होंने भावना की जगह व्यवसाय बना लिया है, ‘इटावा कथावाचन पीडीए अपमान कांड’ उन्हीं कुछ प्रभुत्ववादियों और वर्चस्ववादियों की वजह से घटित हुआ है
– अगर PDA समाज से इन लोगों को इतना ही परहेज है तो घोषित कर दें कि परंपरागत रूप से कथा कहनेवाले वर्चस्ववादी, PDA समाज द्वारा दिया गया चढ़ावा-चंदा, दान-दक्षिणा कभी स्वीकार नहीं करेंगे
– प्रभुत्ववादी और वर्चस्ववादी समय-समय पर कभी घर को गंगा जल से तो कभी मंदिर को धुलवाकर PDA समाज का मानसिक उत्पीड़न व अपमान करते हैं, अब सिर तक मुंडवा रहे हैं
– भाजपा राज में PDA समाज को हेय दृष्टि से देखा जाता है
– सच तो ये है कि जैसे-जैसे PDA समाज में चेतना और जागरूकता बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे PDA समाज पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए वर्चस्ववादियों के PDA समाज पर अत्याचार बढ़ते जा रहे हैं
– PDA समाज पर लगातार बढ़ते हमलों का असली कारण ये है कि वर्चस्ववादियों को लगता है कि उनके पीछे आज भाजपा की वो सरकार खड़ी है, जो सदियों से शक्तिशाली रहे लोगों की सरकार है, और वो उन्हें बचा लेगी लेकिन अब PDA समाज की एकता और एकजुटता इसका जवाब डटकर देगी
– अगर भाजपा को लगता है कि भागवत या कोई कथा कहने पर एक वर्ग विशेष का ही अधिकार है तो फिर वो इसके लिए भी क़ानून बना कर दिखाए
– जिस दिन PDA समाज ने अपनी कथा अलग से कहनी शुरू कर दी, उस दिन इन परंपरागत शक्तियों का साम्राज्य ढह जाएगा













